Mauganj News: मऊगंज के शरद मिश्रा बने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में शासकीय अधिवक्ता

Mauganj News: मऊगंज जिले के एक छोटे से गांव पन्नी पटवा टोला के शरद मिश्रा ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए पूरे जिले सहित क्षेत्र का नाम रोशन किया है. शरद मिश्रा को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट बिलासपुर में राज्य शासन की ओर से पैरवी करने के लिए शासकीय अधिवक्ता (Government Advocate) के रूप में चुना गया है, शरद मिश्रा की सफलता ने जिले सहित पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है.
शरद मिश्रा मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के एक छोटे से गांव पन्नी पटवा टोला के निवासी है. महज 34 साल की उम्र में शरद मिश्रा की यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है जो मेहनत और लगन के सहारे अपने करियर को आगे बढ़ना चाहते हैं.
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जिला न्यायालय से हाईकोर्ट तक का सफर
शरद मिश्रा ने अपने करियर की शुरुआत जिला न्यायालय रायपुर में बतौर अधिवक्ता के रूप में शुरू की थी. बाद में उन्होंने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में वकालत की और कानूनी मामलों में अपनी भूमिका निभाई, इस दौरान वह पैनल लॉयर के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं. कानूनी समझ और लगातार अभ्यास के चलते शरद मिश्रा को राज्य शासन की ओर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पैरवी करने की जिम्मेदारी मिली है.
शरद मिश्रा ने हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HNLU) रायपुर से शिक्षा प्राप्त की है. उनकी नियुक्ति महाधिवक्ता कार्यालय, बिलासपुर के अंतर्गत हुई है. शरद मिश्रा अब शासकीय अधिवक्ता के रूप में उच्च न्यायालय में राज्य सरकार से जुड़े मामलों में सरकार का पक्ष रखेंगे.
पिता भी छत्तीसगढ़ के जाने-माने अधिवक्ता
शरद मिश्रा के पिता रमाकांत मिश्रा ने भी छत्तीसगढ़ के कानूनी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है. रमाकांत मिश्रा 2013 से 2018 उपमाधिवक्ता के पद पर रह चुके हैं. इसके अलावा वे पिछले छह वर्षों से बिलासपुर हाईकोर्ट में उपमहान्यायवादी के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं. कानूनी क्षेत्र से जुड़े परिवार में पले बढ़े शरद मिश्रा ने भी अपनी मेहनत और अनुभव के दम पर बड़ा मुकाम हासिल किया है.
मऊगंज जिले के लिए गौरव की उपलब्धि
पन्नी पटवा टोला जैसे छोटे से गांव से निकलकर छत्तीसगढ़ में शासकीय अधिवक्ता की जिम्मेदारी तक पहुंचने वाले शरद मिश्रा की सफलता अब क्षेत्र सहित पूरे जिले को गौरवान्वित कर रही है. उनकी इस सफलता के बाद पूरे गांव में खुशियों का माहौल है.






